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चमत्कारिक दिव्य संदेश

उमेश पाण्डे

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :169
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9682

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सम्पूर्ण विश्व में भारतवर्ष ही एक मात्र ऐसा देश है जो न केवल आधुनिकता और वैज्ञानिकता की दौड़ में शामिल है बल्कि अपने पूर्व संस्कारों को और अपने पूर्वजों की दी हुई शिक्षा को भी साथ लिये हुए है।

चमत्कारिक दिव्य संदेश

सम्पादकीय

आज विश्व चन्द्रमा की धरती से भी ऊपर जा रहा है। आधुनिकता और वैज्ञानिकता की मैराथन दौड़ में दुनिया अपने अतीत को विस्मृत किये हुए है। सम्पूर्ण विश्व में भारतवर्ष ही एक मात्र ऐसा देश है जो न केवल आधुनिकता और वैज्ञानिकता की दौड़ में शामिल है बल्कि अपने पूर्व संस्कारों को और अपने पूर्वजों की दी हुई शिक्षा को भी साथ लिये हुए है। आज जहाँ विश्व अपने अतीत की तमाम बातों को भूल चुका है भारतीयों ने वहीं उन्हें अपने सीने से लगाकर रखा है। यही कारण है कि भारत में आज भी पुरातनकालीन बातों को हमारे धर्मशास्त्रों में वर्णित तथ्यों को, पूरे विश्वास और श्रद्धा के साथ अमल में लाया जाता है। हमारे पूर्वजों के द्वारा दर्शायी बातों को हम सूर्य और चन्द्रमा के अस्तित्व की भाँति प्रामाणिक मानते हैं। हमारे धर्मग्रंथों और प्राचीन शास्त्रों में वर्णित तथ्यों को हम हमारा पथ प्रदर्शक मानते हैं। सही भी है, यही हमारी मुख्य धरोहर हैं।

'दिव्य संदेश' में हमारे इन्हीं प्राचीन ग्रंथों से कुछ तथ्य आपके समक्ष रखे जाते हैं, कुछ आध्यात्मिक संदेश आपके मन को सुख और शांति प्रदान करने हेतु संकलित रहते हैं-इस आशा और विश्वास के साथ कि इनसे आप अवश्य ही लाभान्वित होंगे।

- सम्पादक


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